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Monday, November 14, 2016

अनार के कीट व रोगों की जानकारी

कीट प्रबंध
छाल भक्षक कीट : यह कीट वृक्ष की छाल को खाता है तथा छिपने के लिए अन्दर डाली में गहराई तक सुरंग बना डालता है जिससे कभी-कभी डाल/शाखा कमजोर पड़ जाती हैं |
नियंत्रण हेतु :-
1.सूखी शाखाओं को काटकर जला देना चाहिए |
2.क्यूनालफास 25 ई.सी 2 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी का घोल बनाकर शाखाओं/डालियों पर छिडके तथा साथ ही सुरंग को साफ करके किसी पिचकारी की सहायता से केरोसिन 3 से 5 मिलीलीटर प्रति सुरंग में डालें या रुई का फाहा बनाकर अन्दर रख देवें एवं गीली मिटटी से बंद कर देवें |
अनार की तितली : मादा तितली पुष्क कली पर अंडे देती है | इनमें लटें निकल कर बनते हुए फलों में प्रवेश कर जाती है | फल को अन्दर ही अंदर खाती है | फलस्वरूप फल सड़ कर गिर जाते है | नियंत्रण हेतु बाग को साफ सुथरा रखना अति आवश्यक है | फूल व फल बनते समय कार्बोरिल 50 डब्ल्यू पी.2 से 4 ग्राम या मोनोक्रोटोफास 36 एस.एल.एक मिलीलीटर प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें |
मिली बाग : इसके अवयस्क (शिशु ) प्राय : नवम्बर-दिसम्बर में बाहर निकल कर तने के सहारे चढ़ते हुए वृक्ष की कोमल टहनियों एवं फूलों पर एकत्रित हो जाते है तथा रस चूस कर नुकसान पहुंचाते है | इनके प्रकोप से फल नहीं बन पाते है | इसके द्वारा एक तरह का मीठा चिपचिपा पदार्थ छोड़ा जाता है जिससे काला कवक लग  जाता है | नियंत्रण हेतु पेड़ के आस-पास की जगह को साफ रखें | अगस्त-सितम्बर तक पेड़ लके थांवले की मिट्टी को पलटते रहे जिससे अंडे बाहर आकार नष्ट हो जाये | क्यूनालफास 1.5 प्रतिशत या मिथाइल पैराथियान 2 प्रतिशत चूर्ण 50-100 फ्राम प्रति पेड़ के थांवले में 10-25 सेटीमीटर की गहराई में मिलावें | शिशु कीट को पेड़ पर चढ़ने से रोकने के लिए नवम्बर में 30-40  सेटीमीटर चौड़ी 400 गेज एल्काथिन की पट्टी जमीन से 60 सेटीमीटर की ऊंचाई पर तने के चारों और लगावें तथा इसके निचले अन्धी,तेज हवाओं के कारन टूट जाते है |

.पौधे की जड़े नर्सरी से उखाड़ते समय कम से कम टूटने पाए
.पौधों को लगाने से पहले किसी छायादार तथा नमी वाले स्थान में रखें |
.पौधे रोगों एवं कीटों से मुक्त होने चाहिए |
.पौधा कम से कम एक वर्ष पुराना होना चाहिए |
.सदाबहारी पौधों को गांची (मिट्टी के गोले के साथ ) जमीं से निकालना चाहिए |
.नर्सरी में पौधा गांची निकालने के बाद,घास,टाट के टुकड़े या अल्काथीन के टुकड़ों के साथ बांधना चाहिए,जिससे रस्ते में गांची  न टूटने पाए तथा जड़ों में उचित नमी बनी रहे |
.परिवहन के दौरान भी पौधों की उचित देखभाल अति आवश्यक है क्योंकि इस दौरान पौधों का जोड़ न टूटने पायें |
.नर्सरी से निकालने के बाद पौधे कम से कम समय में पौधे लगाने वाले स्थान पर पहुँच जायें |
.यदि पौधे को पहुँचाने में अधिक समय लगने की संभावना हो तो रास्ते में जड़ों पर लिपटी हुई घास अथवा टाट को पानी से तर करना आवश्यक है |
      उपरोक्त बातों को मध्यनजर रखते हुए बागवान उधान की व्यवस्था करें व फलदार पौधों का चुनाव करके गुणात्मक व अधिक पैदावार बढ़ायें | 
अनार के कीट व रोगों की जानकारी के बारे में जानने के लिए निचे दिए गए विडियो के लिंक पर क्लिक करें |   https://www.youtube.com/watchv=cH_5Y92mMv4                                                                                                                                                                                                                

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